वास्तविक शिक्षा वह है जो कठिनाईयों का सामना करने में मदद करें : जेके मित्तल

        भिवानी। शिक्षा का अर्थ केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा का अर्थ तब है जब आप जीवन में घटित आम समस्याओं का सामना करने के लिए स्वयं को समर्थ बनाएं। ये बात आज आदर्श महिला महाविद्यालय में नए सत्र की छात्राओं के लिए आयोजित विद्यार्थी प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन बतौर मुख्य वक्ता शिक्षा की शक्ति विषय पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता व सीए जेके मित्तल ने कही। कार्यशाला में अपने अनुभवों को सांझा करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र परिक्षाएं पास करने से आप शिक्षित नहीं बनते बल्कि वास्तविक शिक्षा वह है जो विद्यार्थी को इस जीवन का सामना करने में मदद करें ताकि वह जीवन को समझ सके, उससे हार ना माने और मजबूती के साथ उसका मुकाबला करें। उन्होंने कहा कि लोग, विचार, समाज और देश यह सभी कुछ लगातार आपको उस खास दिशा में ढकेल रहे हैं, जिसमें कि समाज आपको देखना चाहता है। ऐसे समय में आपकी शिक्षा ही एकमात्र ऐसा साधन है जो आपको इस दबाव को समझने के योग्य बनाएंगा। आप रोजमर्रा के जीवन को उचित ठहराने की बजाए उसे समझें और इससे बाहर निकलें। ताकि एक शिक्षित एवं सभ्य मनुष्य होने के नाते आप आगे बढक़र कुछ नया करने में सक्षम हो सकें और केवल परंपरागत ढंग से ही विचार करते न रह जाएं। यही वास्तविक शिक्षा है। श्री मित्तल ने बड़ें ही संजीदा एवं तर्कपूर्ण छात्राओं के मानस में उज्जवलित सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमें देश के संविधान और उसमें दिए गए कानूनों एवं अधिकारों का ज्ञान जरूर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कानूनी रूप से हमारे पास मौलिक, उपभोक्ता एवं जानने का अधिकार जैसी सुविधाएं प्राप्त है परन्तु जानकारी के अभाव में हम इनका प्रयोग नहीं कर पाते और व्यवस्था से हार मान जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अधिकारों का सौ प्रतिशत प्रयोग करना चाहिए लेकिन यह भी ध्यान रहे कि हम अपनी शिक्षा और अधिकारों का गलत प्रयोग न करें। उन्होंने कहा कि आरटीआई तथा मौलिक अधिकारों के प्रति छात्र जागरूक रहें ताकि आपके अधिकारों का हनन न हो। कार्यशाला के दूसरे मुख्यवक्ता शिक्षाविद् डॉ. किसलय घोष ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में एकाग्रता, धैर्य और संकल्प की दृढ़ता से ही व्यक्ति जीवन में मनोवांछित स्थान प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी स्वयं लक्ष्य को ध्यान में रखकर भविष्य का निर्धारण करें। छात्राओं को अच्छी संगत, उत्तम आहार और उत्कृष्ट चिंतन जैसी व्यावहारिक बातें अपनाए जाने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन भावी जीवन की आधारशिला है। आधारशिला यदि दृढ़ है तो उस पर बना हुआ भवन भी टिकाऊ और स्थायी होता है। इसी प्रकार, यदि विद्यार्थी जीवन परिश्रम, अनुशासन, संयम और नियमन में व्यतीत हुआ है तो निश्चय ही उसका भावी जीवन सुखद, सुंदर और परिवार, समाज तथा देश के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रबंधक समिति के महासचिव अशोक बुवानीवाला, कोषाध्यक्ष सुंदरलाल अग्रवाल, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अरूणा सचदेव, संयोजिका नूतन शर्मा, गायत्री आर्य, मेघा यादव, निकिता पुनीयानी, ज्योति गाबा, सोनिया बजाज, प्रीति चौधरी, प्रियंका ग्रोवर, मंजू बाई, रूचि जांगड़ा, कल्पना भी उपस्थित रही।

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